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Friday, October 22, 2010

नैनीताल से लौटने के नशे के बीच से कुछ...

हाल ही में नैनीताल जाना हुआ। वहां ताल में बोटिंग करते हुए कुछ पंक्तियां लिखने का मन हुआ। कुछ तस्वीरें उतारने का जी किया। नैनीताल को अपने शब्दों में बयां करती शब्दों और तस्वीरों की ये जुगलबंदी आपके लिये.....























वो नशीली सी झील मस्तानी
गुनगुनी  धूप गुनगुना पानी।

आज सूरज चांद बनके बिखरने सा लगा
बनके तारा पानी में उभरने सा लगा। 

बूंदों में पसरने लगी दूधिया पिघलन
जैसे पानी में ही बस आया हो चमकता सा चमन।

घिरती चट्टानों का बनता वो वलय
उनकी गोदी से वो सूरज का उदय

रात को शहर डूब डूब के तिरता है यहां
 बनके आवारा सा अंधेरे में फिरता है यहां

रगों में तैरती सिहरन भी नशे जैसी है
सर्द रातों में डूबती हुई मदहोशी है

धूप पेड़ों की पत्तियों से ओस सी टपके
रुह में जाती है उतर गर्माहट छनके

आज दो पालों से तारे खे लें
आज गीली सी रोशनी ले लें

आज पूंछे न कुछ जानें कि जिन्दगी क्या है
आज महसूस करें राजे दिललगी क्या है

तैरते चमकते सारे जवाब सामने सवाल है क्या
कैसे कह दूं कि नैनीताल है क्या।


1 comments:

anjule shyam said...

बेहद उम्दा....नैनीताल की ताजगी को अपने में समेटे हउवे....