उन लोगों के हाथ में एक वोटर लिस्ट थी। जिससे वो पता कर रहे थे कि कौन सा सिख किस घर में रहता है। जैसे ही वो एक परिवार को मौत के घाट उतारते वो लिस्ट से उसका नाम काट लेते। उनमें से ज्यादातर पढ़े लिखे नहीं थे। और जो कुछ एक पढ़े लिखे थे उनके हाथ में लिस्ट थी। बाकि लोगों के पास तलवारें थी। इस तरह एक एक करके दिल्ली के अलग अलग कोनों से हज़ारों सिख मौत के घाट उतार दिये गये। और ये सब एक बड़ी राजनैतिक पार्टी के संरक्षण में हुआ जो अपने आप को सेक्यूलर कहती है। ये भीषण नरसंहार इन्दिरा गांधी की उनके सिख बौडीगार्डस द्वारा की गई हत्या का प्रतिवाद थी।
इन्दिरा गांधी की मौत के बाद भारत में चौरासी के जो दंगे हुए उनके दोशियों को आज तक सजा नहीं मिली। बावजूद इसके कि इस बड़े घृणित कहे जा सकने वाले नरसंहार में 4000 से ज्यादा सिख मौत के घाट उतार दिये गये। बल्कि मानवाधिकारों पर काम करने संगठन 10 से 17 हज़ार सिखों की मौत का दावा करते हैं। इस दुर्घटना के लगभग 27 साल बाद अब तक 9 कमीशन दंगों की जांच के लिये बैठाये जा चुके हैं जो फिलवक्त ये फैसला करनेे में सक्षम नहीं हैं कि इन दंगों का दोशी आंखिर था कौन।
हमारे देश की एक खास बात है कि यहां हर बात में विविधता पाई जाती है। यही विविधता नफरत, नरसंहार और दंगाईयों की मानसिकता में भी है। ये विविधता कभी गोधरा, कभी बाबरी, कभी सिखविरोधी तो कभी तमिल विरोधी दंगों में देखने को मिल जाती है। यहां कभी मुंम्बई में भैयाओं के साथ मारपीट होने लगती है तो कभी उड़ीसा में ईसाईयों की हत्या कर दी जाती है। लेकिन इन सारी घटनाओं या दुर्घटनाओं के पीछे एक मान्यता जो सबसे अहम उत्प्रेरक की भूमिका अदा करती है वो है क्रिया की प्रतिक्रिया। इस एक अकेले तर्क पर सभी हिंसक वारदातों को जस्टिफाई करने की कोशिश की जाती है। और सिख विरोधी दंगों या फिर गोधरा जैसे मामलों में ऐसी घटनाओं को एक पूरा स्टेट, पूरा सिस्टम जस्टिफाई करता दिखाई देता है।
महात्मा गांधी ने एकबार एक बात कही थी An eye for an eye makes the whole world blind. यानि कि किसी ने अगर गलत किया है तो उसके जवाब में एक ऐसी ही बड़ी गलती करना कोई समझदारी का काम नहीं है। दंगा या नरसंहार कभी भी किसी समस्या का मानवीय हल नहीं हो सकता। इस तरह की हिंसक वारदातों का इलाज रब्बी शेरगिल के एक गीत में दिखाई देता है। ये म्यूजिक वीडियो रब्बी शेरगिल के इस गीत और महात्मा गांधी के उस कोटेशन के मूल विचार के साथ चौरासी के सिख विराधी दंगों को केन्द्र में रखकर बनाया गया है।
निर्माता - शशांक वालिया, उमेश पंत, सोनिया वालिया, कदीर अहमद
एमसीआरसी जामिया मिल्लिया इस्लामिया





















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