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Sunday, May 8, 2011

पढ़ाई की जगह पिटाई, क्या यही है एमसीआरसी का असली चेहरा

जामिया के एमसीआरसी के छात्रों की भूख हड़ताल का आज दूसरा ही दिन था और प्रशासन को ये गवारा न हुआ कि उन्हें अपनी बात शान्तिपूर्ण तरीके से रखने दी जाये। उन्होंने छात्रों के शान्तिपूर्ण विरोध का दमन करने के लिये जो तरीका अपनाया आप इस वीडियो में देख सकते हैं। पुलिस ने स्थानीय एसएचओ सतबीर सिंह डागर के नेतृत्व में इन छात्रों पर लाठीचार्ज किया। आज जामिया के छात्रों के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू के छात्र भी भूख हड़ताल में शामिल थे।  पुलिस के लाठीचार्ज के दौरान  जामिया के छात्र अरहान को काफी चोटें आई और ब्लीडिंग भी हुई। अरहान की मां भी वहां मौजूद थी जिन्होंने इस घटना का विरोध किया तो पुलिस ने उन्हें भी पीटने की धमकी दी। पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों के बैनर] पर्चे और बिस्तर भी जब्त कर लिये और इनमें से कुछ छात्रों को अपने साथ ले गई और कुछ देर हिरासत में रखा। होना तो ये चाहिये था कि एमसीआरसी के डाईरेक्टर छात्रों के साथ मिलकर कोई समाधान निकालते। लेकिन उन्हें कानून और पुलिस के डंडे की भाषा के सिवाय कोई और भाषा आती ही कहां है। 


इससे पहले भी डाईरेक्टर साहब छात्रों से हमेशा नोटिस और धमकी की जबान में ही बात करते रहे हैं। ये वीडियो अपने ही संस्थान के छात्रों के प्रति उनके रवैय्ये का एक छोटा सा नमूना है। कुछ इसी तरह का रवैय्या छात्रों के लिये जामिया के निवर्तमान वाईस चांसलर का भी है। इस मसले पर सुनवाई के बाद जब  न्यायालय ने कहा था कि जामिया के वीसी  इस मामले पर कोई फैसला ले सकते हैं तो छात्र उनके पास गये कि वो इस मसले का कोई समाधान निकालें। लेकिन वो तो पहले से ही जंग के मूड में थे। उन्होंने ये कहते हुए छात्रों को लताड़ लगा दी कि अगर आपके पास पैसे नहीं हैं या फिर आपको कोई बड़ी बीमारी है तो जामिया में पढ़ने के लिए मत आएं। मैं जामिया को बहुत ही सख्ती से रुल करने वाला हूं। डाईरेक्टर साहब छात्रों की इस मांग को नाजायज बताकर अपनी फैकल्टी की लापरवाहियो को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। और इस मामले में जामिया के वीसी उनकी पूरी तरह से मदद कर रहे हैं। कहां तो ये स्टूडेन्टस इस समय अपनी फिल्मों की पटकथा को फिल्माने के लिये दिमागी मशक्कत कर रहे होते और कहां एमसीआरसी उन्हें लाठियों से पिटवा रहा है। ये हैरानी की बात है कि एक फिल्म स्कूल जिसका काम छात्रों को फिल्मकार बनाने का है वो छात्रों को आन्दोलनकारी बनने पर मजबूर कर चुका है। अब आगे देखना है कि ये मामला क्या मोड़ लेता है। लेकिन फिलहाल जामिया] दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू के छात्रों ने इस मुददे पर एक होकर लामबंद होने का फैसला कर लिया है। कल इस मामले को लेकर एक शान्ति मार्च निकाले जाने की भी योजना है।  

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