एमसीआरसी की छात्रा सबा रहमान की टिप्पणी
कल एमसीआरसी के छात्रों के विरोध प्रदर्शन का तीसरा दिन था। बिना खाये पिये वो अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। फाईनल इयर की सानिया अहमद और फहद की हालत आज बिगड़ गई। उन्हें होली फैमिली हौस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा। कल की हिंसक कार्रवाई के बाद आज इन छात्रों के समर्थन में कुछ ज्यादा लोग जुटे। लेकिन जामिया के वीसी और एमसीआरसी के डाईरेक्टर दोनों के कान में अब तक जूं नहीं रेंगी है। पत्रकारों ने उनसे सम्पर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फोन उठाना भी गवारा न समझा। अब इसे किसी तरह हठ कहा जाये या फिर भागने की कोशिश लेकिन जो भी हो इससे मामले का कोई हल नहीं निकलेगा। एमसीआरसी की फैकल्टी की ओर से जीआर सैययद अपनी पत्नी के साथ धरने पर छात्रों का हाल जानने पहुंचे। एफ बी खान भी कुछ देर के लिये आये और छात्रों से बात की। लेकिन किसी भी समाधान के लिये वीसी या डाईरेक्टर साहब का इस मामले पर कुछ कहना जरुरी है। जो कि अब तक नहीं हुआ है। इस बीच छात्रों को प्रिटं मीडिया का पूरा सपोर्ट मिला। आज लगभग हर समाचार पत्र में जामिया का तानाशाही रवैयया खबर बना लेकिन इलैक्टोनिक मीडिया को इस खबर में कोई ग्लैमर नहीं दिखा।
इस बीच जामिया के पूर्व छात्रों की ओर से प्रतिक्रिया का दौर जारी है। मुम्बई में काम कर रहे ओसामा शाब इस मामले को लेकर कहते हैं कि शान्तिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का मूलभूत तत्व है। ये एक अकेला तरीका है जिससे कि हम कह सकते हैं कि कुछ गलत हो रहा है। मुझे हमेशा से मालूम था कि हमारे देश का इतना लोकतांत्रिक हो पाना एक दूर की बात है। लेकिन सड़कों पर शान्तिपूर्ण तरीके से अपने अधिकार को मांगने के लिए बैठे हुए जामिया के छात्रों को पिटवाया और गिरफतार करवाया जाना एक बहुत ही निन्दनीय घटना है। उम्मीद यही है कि इस घृणित काम की खबर ज्यादा से ज्यादा लोगों को हो ताकि इसके खिलाफ एक माहौल बनाया जा सके।
अभी तक जामिया की फैकल्टी से जुड़े रहे लोगों ने इस मामले पर चुप रहना ही बेहतर समझा था। लेकिन कल हुई हिंसक घटना के बाद उन्हें भी महसूस हुआ कि अब ज्यादा हो गया है। आज उनकी चुप्पी भी टूटी । जामिया की पूर्व फैकल्टी मेम्बर स्रुति नागपाल ने कहा हिंसा और ताकत जीतती हुई नजर तो आती है पर ऐसी जीत बहुत अल्पजीवी होती है। मैं कैम्पस में छात्रों के विरुद्ध हो रही किसी भी हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने के अधिकार का सम्मान करती हूं।
अनशन स्थल पर मौजूद कन्वर्जेन्ट जर्नलिजम की छात्रा आकांक्षा सक्सेना ने बताया कि कल की घटना के बाद आज कैम्पस के चारों ओर मौजूद भारी पुलिस दल ने सब कुछ अपने आप कह दिया। वहां हो क्या रहा है ये जानने के लिये उत्सुक राह चलते लोग कुछ देर वहां रुके तो उन्हें जानकारी हुई कि ये छात्र अपने अधिकार के लिये लड़ रहे हैं। आज जामिया की फैकल्टी से कुछ लोग यहां आये और उन्होंने छात्रों की कहानी सुनी। उम्मीद है कि अब कुछ हल निकलेगा। समय आ गया है कि हम एक होकर न्याय की गुहार लगायें। अगर हम अलग हुए तो टूट जायेंगे। हमने इस बीच कैम्पस प्लेसमेंट से लेकर छात्रों के अधिकारों तक हर चीज में एमसीआरसी के स्तर में भारी गिरावट देखी है। एमसीआरसी स्वार्थी और भ्रष्ट लोगों की मंडली में तब्दील होता जा रहा है। हमें एमसीआरसी को डिक्टेरशिप से बचाने का प्रयास करना चाहिये।इस पूरे मामले को लेकर जामिया विश्वविद्यालय ने एक वैबसाईट को दी गई अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि ये बड़ी निराशा की बात है कि कुछ असामाजिक तत्व एजेकेएमसीआरसी के छात्रों द्वारा किये जा रहे धरने को पूरे एरिया की शान्ति भंग करने के उददेश्य से हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं। जामिया की ओर से आयी ये प्रतिक्रिया छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बारे में लोगों को दिग्भ्रमित करने की कोशिश से ज्यादा और कुछ नहीं लगती।
अभी कुछ ही देर में जामिया के वीसी और छात्रों की मुलाकात तय की गई है। साथ ही एचआरडी मिनिस्टी में भी छात्रों को आज अपनी बात रखने के लिये बुलाया गया है। देखना है कि उस मुलाकात का क्या नतीजा निकलता है। फिलवक्त उम्मीद की जानी चाहिये कि छात्रों के हित को गलती से ही सही ध्यान में रखकर संस्थान आगे कोई कार्यवाई करेगा।





















1 comments:
ये वर्तमान है भविष्य कैसा होगा।
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